
कंधे में दर्द से परेशान व्यक्ति
आज के समय में हड्डियों, जोड़ों और शरीर के अंदरूनी अंगों की जांच के लिए कई आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं। इनमें एक्स-रे और एमआरआई सबसे अधिक प्रचलित जांचें हैं। लेकिन अक्सर मरीजों को यह समझ नहीं आता कि एक्स-रे और एमआरआई में क्या अंतर है, और किस स्थिति में कौन-सी जांच करानी चाहिए।
इस लेख में हम सरल हिंदी में समझेंगे कि एक्स-रे और एमआरआई क्या हैं, इनमें क्या फर्क है, और किन परिस्थितियों में कौन-सी जांच ज्यादा उपयुक्त होती है।
एक्स-रे एक बेसिक इमेजिंग जांच है जिसमें कम मात्रा में रेडिएशन का उपयोग करके शरीर के अंदर की तस्वीर ली जाती है। यह मुख्य रूप से हड्डियों की स्थिति देखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

डॉक्टर मरीज को एक्स-रे दिखाते हुए
एक्स-रे किरणें शरीर के आर-पार जाती हैं। हड्डियां इन किरणों को ज्यादा रोकती हैं, इसलिए तस्वीर में सफेद दिखाई देती हैं, जबकि मुलायम ऊतक (मसल, फैट आदि) कम स्पष्ट दिखाई देते हैं।
एक्स-रे आमतौर पर इन स्थितियों में किया जाता है:
यदि किसी व्यक्ति को गिरने के बाद तेज दर्द है और डॉक्टर को फ्रैक्चर का संदेह है, तो सबसे पहले एक्स-रे ही कराया जाता है। यह जल्दी, सस्ता और आसानी से उपलब्ध जांच है।
एमआरआई (Magnetic Resonance Imaging) एक उन्नत इमेजिंग तकनीक है जो चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों की विस्तृत तस्वीरें बनाती है। इसमें किसी प्रकार का रेडिएशन नहीं होता।

कंप्यूटर पर एमआरआई स्कैन देखते हुए रेडियोलॉजिस्ट
एमआरआई मशीन शरीर के अंदर मौजूद पानी के अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करके हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेज बनाती है। इससे मांसपेशियां, नसें, लिगामेंट, डिस्क, और सॉफ्ट टिश्यू बहुत स्पष्ट दिखाई देते हैं।
एमआरआई इन स्थितियों में ज्यादा उपयोगी होता है:
यदि एक्स-रे में कुछ स्पष्ट नहीं दिखता लेकिन दर्द बना रहता है, तो डॉक्टर एमआरआई की सलाह दे सकते हैं।
कुछ स्थितियों में केवल एक्स-रे से ही सही निदान हो जाता है, जैसे:
यदि समस्या केवल हड्डी से जुड़ी है और लिगामेंट या नस की आशंका नहीं है, तो एक्स-रे ही पर्याप्त होता है।
निम्न स्थितियों में एमआरआई ज्यादा आवश्यक होता है:
उदाहरण के लिए, अगर किसी खिलाड़ी के घुटने में चोट लगी है और सूजन व अस्थिरता महसूस हो रही है, तो एमआरआई से लिगामेंट की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
कई मरीज सोचते हैं कि एमआरआई “ज्यादा एडवांस” है, इसलिए हर दर्द में वही कराना चाहिए। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। कई मामलों में पहले एक्स-रे से ही स्थिति स्पष्ट हो जाती है। बिना आवश्यकता के एमआरआई कराना समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो सकती है।
सही जांच का चयन डॉक्टर की क्लिनिकल जांच और लक्षणों के आधार पर किया जाता है।
एक्स-रे और एमआरआई दोनों ही महत्वपूर्ण जांचें हैं, लेकिन इनका उपयोग अलग-अलग परिस्थितियों में किया जाता है। एक्स-रे मुख्य रूप से हड्डियों की जांच के लिए उपयुक्त है, जबकि एमआरआई सॉफ्ट टिश्यू, नसों और लिगामेंट की विस्तृत जानकारी देता है।
इसलिए यह जरूरी है कि जांच का निर्णय विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह से ही लिया जाए। यदि आपको हड्डी, जोड़ों या रीढ़ से संबंधित कोई समस्या है और सही जांच को लेकर भ्रम है, तो Noida में Dr. Ankur Singh से परामर्श लेकर आप सही मार्गदर्शन और उचित जांच का चयन कर सकते हैं।