
सुबह उठते समय गर्दन में अकड़न और दर्द
बहुत से लोग सुबह उठते ही महसूस करते हैं कि शरीर भारी लग रहा है, जोड़ों में जकड़न है या हल्का दर्द है। कुछ देर चलने-फिरने के बाद यह अकड़न कम हो जाती है। कई लोग इसे उम्र या थकान का असर मान लेते हैं, लेकिन अक्सर यह शरीर के अंदर चल रही किसी समस्या का संकेत भी हो सकता है।
नींद के दौरान शरीर लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहता है। इससे जोड़ों और मांसपेशियों में तरल पदार्थ जमा हो सकता है, जिससे सुबह अकड़न महसूस होती है।
गलत तकिया, बहुत नरम या बहुत सख्त गद्दा शरीर के संतुलन को बिगाड़ सकता है।
शरीर में पानी की कमी से मांसपेशियाँ सख्त हो जाती हैं।
अगर अकड़न लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह आर्थराइटिस जैसी समस्याओं का संकेत हो सकती है।
ऑफिस वर्क या लगातार स्क्रीन के सामने बैठने से मांसपेशियाँ जकड़ जाती हैं।

लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करता व्यक्ति
कम चलना-फिरना शरीर को सुस्त बना देता है।
उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों की लचीलापन कम हो जाती है।
अगर रोज़ सुबह अकड़न लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे हल्के में न लें।
सूजन और लालिमा गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकती है।
उठते ही हल्की स्ट्रेचिंग से ब्लड फ्लो बेहतर होता है।

सुबह उठकर शरीर को स्ट्रेच करती महिला
गर्म पानी मांसपेशियों को आराम देता है।
रीढ़ की प्राकृतिक स्थिति को सपोर्ट करने वाला बिस्तर चुनें।
दिन भर हाइड्रेटेड रहना बेहद ज़रूरी है।
सुबह की अकड़न अक्सर जीवनशैली से जुड़ी आदतों का नतीजा होती है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सही नींद से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सुबह उठते ही शरीर में अकड़न होना आम है, लेकिन लगातार रहने पर इसे नज़रअंदाज़ करना सही नहीं। समय रहते कारण समझकर कदम उठाना भविष्य की बड़ी समस्याओं से बचा सकता है।
अगर सुबह की अकड़न या जोड़ों का दर्द आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है, तो Dr. Ankur Singh जैसे अनुभवी ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह लेकर सही दिशा में इलाज शुरू किया जा सकता है।