
हिप जॉइंट में दर्द और फ्रैक्चर को दिखाता हुआ एक्स-रे चित्र
हिप फ्रैक्चर यानी कूल्हे की हड्डी का टूटना एक गंभीर समस्या है, खासकर बुजुर्गों में। यह सिर्फ हड्डी की चोट नहीं होती, बल्कि व्यक्ति की चलने-फिरने की आजादी को भी प्रभावित करती है। कई मामलों में लंबे समय तक बेड रेस्ट और सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
हिप जॉइंट वह जगह है जहां जांघ की हड्डी पेल्विस से जुड़ती है। जब इस हिस्से में दरार या टूटन आ जाती है, तो उसे हिप फ्रैक्चर कहा जाता है। यह फ्रैक्चर हल्का भी हो सकता है और पूरी तरह हड्डी टूटने जैसा गंभीर भी।
घर में फिसलना, बाथरूम में गिरना या सीढ़ियों से फिसलना बुजुर्गों में हिप फ्रैक्चर का सबसे बड़ा कारण है।
ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और हल्की चोट से भी फ्रैक्चर हो सकता है।

कमर दर्द से जूझ रहे बुजुर्ग व्यक्ति को सहारा देती उनकी पत्नी
युवाओं में हिप फ्रैक्चर का बड़ा कारण एक्सीडेंट या ऊंचाई से गिरना होता है।
घर में फिसलन कम करें, बाथरूम में ग्रैब बार लगवाएं और रात में पर्याप्त रोशनी रखें।
कैल्शियम, विटामिन D और नियमित हल्की एक्सरसाइज हड्डियों को मजबूत बनाती है।
योग, वॉकिंग और बैलेंस एक्सरसाइज गिरने का खतरा कम करती हैं।
कमजोर नजर या कुछ दवाएं चक्कर बढ़ा सकती हैं। नियमित जांच जरूरी है।
हिप फ्रैक्चर के बाद देर से इलाज करने पर बेडसोर्स, फेफड़ों की समस्या और चलने-फिरने में स्थायी परेशानी हो सकती है। समय पर सर्जरी और फिजियोथेरेपी रिकवरी को बेहतर बनाती है।

कमर दर्द से पीड़ित बुजुर्ग मरीज
हिप फ्रैक्चर उम्र के साथ जुड़ी समस्या जरूर है, लेकिन सही सावधानी, पोषण और समय पर इलाज से इसके प्रभाव को काफी कम किया जा सकता है।
अगर कूल्हे में दर्द, गिरने के बाद चलने में दिक्कत या हड्डी से जुड़ी कोई समस्या हो, तो समय पर विशेषज्ञ सलाह के लिए Dr Ankur Singh से संपर्क करें।