
ठंड के मौसम में महिला को पुराने फ्रैक्चर वाली जगह पर दर्द महसूस होता हुआ
बहुत से मरीज यह शिकायत करते हैं कि जिन हड्डियों में पहले कभी फ्रैक्चर हुआ था, वहाँ सर्दियों में दर्द बढ़ जाता है। मौसम बदलते ही पुराने चोट वाले स्थान पर खिंचाव, जकड़न या हल्का-तेज दर्द महसूस होने लगता है।
क्या यह सिर्फ वहम है?
या सच में ठंड का असर पुराने फ्रैक्चर पर पड़ता है?
नोएडा के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. अंकुर सिंह के अनुसार, यह समस्या आम है और इसके पीछे वैज्ञानिक कारण मौजूद हैं। आइए विस्तार से समझते हैं।
हाँ, कई लोगों में मौसम परिवर्तन, विशेषकर ठंड और नमी बढ़ने पर, पुराने फ्रैक्चर या जोड़ों में दर्द बढ़ सकता है। हालांकि हर व्यक्ति में ऐसा नहीं होता, लेकिन जिनकी हड्डी में पहले चोट लगी हो, उनमें यह ज्यादा देखा जाता है।
ठंड में शरीर की मांसपेशियाँ और लिगामेंट सिकुड़ जाते हैं। इससे पुराने फ्रैक्चर वाली जगह पर खिंचाव बढ़ सकता है, जिससे दर्द महसूस होता है।
ठंड के मौसम में शरीर की रक्त वाहिकाएँ संकुचित हो जाती हैं। इससे प्रभावित हिस्से में रक्त संचार कम हो सकता है, जो दर्द और जकड़न को बढ़ा सकता है।
मौसम बदलने पर वातावरणीय दबाव कम हो सकता है। इससे शरीर के अंदर ऊतकों में हल्की सूजन या दबाव महसूस हो सकता है, जो पुराने फ्रैक्चर वाली जगह पर असहजता पैदा करता है।
यह जरूरी नहीं है।
यदि फ्रैक्चर सही तरीके से जुड़ चुका है और एक्स-रे में सब सामान्य है, तो मौसम के कारण होने वाला हल्का दर्द चिंता का विषय नहीं होता। लेकिन यदि दर्द लगातार बढ़ रहा है, सूजन है, या चलने-फिरने में दिक्कत हो रही है, तो जांच जरूरी है।
इन स्थितियों में ठंड का असर ज्यादा महसूस हो सकता है।

घुटने में दर्द और सूजन, पुराने फ्रैक्चर या जोड़ की समस्या का संकेत
कुछ मरीज जिनकी सर्जरी के दौरान धातु की प्लेट या स्क्रू लगाए गए होते हैं, वे सर्दियों में ज्यादा संवेदनशीलता महसूस करते हैं।
हालांकि धातु ठंड को सीधे “अंदर तक” नहीं पहुंचाती, लेकिन आसपास के ऊतकों की संवेदनशीलता बढ़ने से दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है।
कभी-कभी हाँ।
अगर फ्रैक्चर किसी जोड़ के पास हुआ था (जैसे घुटना, टखना, कलाई), तो समय के साथ उस जोड़ में आर्थराइटिस विकसित हो सकता है।
आर्थराइटिस में ठंड के मौसम में दर्द और जकड़न बढ़ना आम बात है।
ऐसे लक्षण दिखें तो ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।
नहीं। अगर आपको निम्न लक्षण महसूस हों, तो तुरंत जांच करानी चाहिए:
ये संकेत किसी नई समस्या, जैसे संक्रमण या हड्डी में कमजोरी, की ओर इशारा कर सकते हैं।
डॉ. अंकुर सिंह कुछ सरल उपाय सुझाते हैं:
प्रभावित हिस्से को गर्म रखें। गर्म कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर हल्की सिकाई करें।

ठंड में दर्द से बचाव के लिए पैरों की स्ट्रेचिंग करते हुए व्यक्ति
हड्डियों की मजबूती के लिए संतुलित आहार और आवश्यक सप्लीमेंट लें, यदि डॉक्टर सलाह दें।
अधिक वजन जोड़ों और पुरानी चोट वाली जगह पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
यदि दर्द ज्यादा हो, तो विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी से राहत मिल सकती है।
अधिकतर मामलों में नहीं।
सही इलाज, उचित आराम और रिहैबिलिटेशन के बाद फ्रैक्चर पूरी तरह ठीक हो जाता है। हल्का मौसमी दर्द सामान्य हो सकता है, लेकिन लगातार दर्द रहना सामान्य नहीं है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ऑर्थोपेडिक सेवाएं प्रदान कर रहे डॉ. अंकुर सिंह का कहना है कि पुराने फ्रैक्चर का दर्द अक्सर मौसम के कारण बढ़ सकता है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर दर्द बार-बार हो रहा है या आपकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है, तो सही जांच और उपचार आवश्यक है। समय पर परामर्श लेने से बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।
ठंड के मौसम में पुराने फ्रैक्चर वाली जगह पर दर्द बढ़ना आम बात है। इसके पीछे मांसपेशियों का सिकुड़ना, रक्त प्रवाह में कमी और मौसम के दबाव में बदलाव जैसे कारण हो सकते हैं।
लेकिन हर दर्द को “सिर्फ मौसम” कहकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। यदि दर्द लगातार बना रहता है या बढ़ता जा रहा है, तो ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। आपकी हड्डियों का स्वास्थ्य आपके सक्रिय जीवन की नींव है — इसे अनदेखा न करें।