
व्यक्ति पैर में सपोर्ट बूट के साथ फ्रैक्चर की चोट दर्शाते हुए
जब किसी हड्डी में दरार आ जाती है या वह पूरी तरह टूट जाती है, तो उसे फ्रैक्चर कहा जाता है। यह दुर्घटना, गिरने, खेल के दौरान चोट, सड़क हादसे या हड्डियों की कमजोरी (जैसे ऑस्टियोपोरोसिस) के कारण हो सकता है।
हर फ्रैक्चर में सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। कई मामलों में प्लास्टर, ब्रेस या आराम से हड्डी ठीक हो जाती है। लेकिन कुछ स्थितियों में सर्जरी अनिवार्य हो जाती है ताकि हड्डी सही तरीके से जुड़ सके और भविष्य में कोई जटिलता न हो।
सर्जरी की आवश्यकता समझने से पहले फ्रैक्चर के प्रकार जानना ज़रूरी है:
हड्डी टूटी होती है, लेकिन त्वचा नहीं फटी होती।

हाथ पर प्लास्टर बंधा व्यक्ति, साधारण फ्रैक्चर के उपचार को दर्शाते हुए
हड्डी त्वचा को फाड़कर बाहर आ जाती है। इसमें संक्रमण का खतरा अधिक होता है।
हड्डी कई टुकड़ों में टूट जाती है।
हड्डी के दोनों सिरे अपनी सामान्य स्थिति से हट जाते हैं।
इनमें से कुछ प्रकार ऐसे होते हैं जिनमें बिना सर्जरी के सही उपचार संभव नहीं होता।
अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न – फ्रैक्चर का ऑपरेशन कब किया जाता है?
यदि हड्डी के सिरे एक सीध में नहीं हैं, तो केवल प्लास्टर से उन्हें स्थिर रखना कठिन होता है। ऐसे में सर्जरी करके प्लेट, स्क्रू या रॉड लगाकर हड्डी को सही स्थिति में रखा जाता है।
जब हड्डी त्वचा को फाड़कर बाहर आ जाती है, तो तुरंत सर्जरी आवश्यक होती है।
कारण:
यदि हड्डी कई भागों में टूट गई है, तो उसे स्थिर करने के लिए आंतरिक फिक्सेशन (Internal Fixation) की आवश्यकता होती है।
जोड़ के आसपास की हड्डी का फ्रैक्चर यदि ठीक से नहीं जुड़ा, तो भविष्य में गठिया या जॉइंट जाम होने की समस्या हो सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में सर्जरी की सलाह दी जाती है।
यदि फ्रैक्चर के साथ सुन्नपन, अत्यधिक सूजन, या खून का प्रवाह कम होने के संकेत हों, तो यह आपात स्थिति हो सकती है। ऐसी स्थिति में तत्काल सर्जरी की आवश्यकता होती है।
कभी-कभी प्लास्टर के बाद भी हड्डी सही तरीके से नहीं जुड़ती। इसे नॉन-यूनियन कहते हैं। ऐसी स्थिति में सर्जरी कर हड्डी को दोबारा स्थिर करना पड़ता है।
इनमें अक्सर सर्जरी आवश्यक होती है।
सर्जरी का तरीका फ्रैक्चर के प्रकार और स्थान पर निर्भर करता है।

ऑपरेशन थिएटर में सर्जन टीम द्वारा फ्रैक्चर की सर्जरी करते हुए दृश्य
टूटी हड्डी को सही स्थिति में रखकर प्लेट और स्क्रू से फिक्स किया जाता है।
लंबी हड्डियों जैसे फीमर में रॉड डाली जाती है।
कुछ जटिल मामलों में बाहर से फ्रेम लगाकर हड्डी को स्थिर किया जाता है।
इन सभी प्रक्रियाओं का उद्देश्य है – हड्डी को स्थिर रखना ताकि वह सही स्थिति में जुड़ सके।
नहीं। यह निर्णय एक्स-रे, एमआरआई (यदि आवश्यक हो), फ्रैक्चर की स्थिति, मरीज की उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। बच्चों में कई फ्रैक्चर बिना ऑपरेशन के ठीक हो जाते हैं क्योंकि उनकी हड्डियों में पुनर्निर्माण क्षमता अधिक होती है। वहीं बुजुर्गों में हड्डी की कमजोरी के कारण सर्जरी की आवश्यकता अधिक हो सकती है।
यदि ज़रूरी होने के बावजूद सर्जरी न कराई जाए, तो निम्न समस्याएं हो सकती हैं:
इसलिए सही समय पर निर्णय लेना बहुत महत्वपूर्ण है।
फ्रैक्चर सर्जरी के बाद:
अधिकांश मरीज कुछ हफ्तों से महीनों में सामान्य गतिविधियों में लौट सकते हैं, लेकिन यह फ्रैक्चर के प्रकार पर निर्भर करता है।
यदि आपको चोट के बाद ये लक्षण दिखें, तो तुरंत ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से संपर्क करें:
जल्दी इलाज से जटिलताओं को रोका जा सकता है।
हर फ्रैक्चर में सर्जरी आवश्यक नहीं होती, लेकिन कुछ स्थितियों में यह जीवन-रक्षक और कार्यक्षमता बहाल करने वाला कदम होता है। सही जांच, सही समय पर निर्णय और विशेषज्ञ की सलाह से ही सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं।
यदि आपको या आपके परिवार में किसी को फ्रैक्चर हुआ है और आप यह जानना चाहते हैं कि सर्जरी आवश्यक है या नहीं, तो विशेषज्ञ मूल्यांकन कराना बेहद ज़रूरी है।
हड्डियों और जोड़ों की किसी भी समस्या के लिए आप Dr. Ankur Singh, अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन, से परामर्श लेकर सही निदान और उन्नत उपचार प्राप्त कर सकते हैं।