
रिकेट्स से पीड़ित बच्चे के मुड़े हुए पैर, हड्डियों की कमजोरी का संकेत
रिकेट्स एक ऐसी बीमारी है जो मुख्य रूप से बच्चों की हड्डियों को प्रभावित करती है। यह रोग तब होता है जब बच्चों के शरीर में विटामिन D, कैल्शियम या फॉस्फोरस की कमी हो जाती है। इन पोषक तत्वों की कमी से हड्डियां नरम और कमजोर हो जाती हैं, जिससे उनका सही विकास नहीं हो पाता। भारत जैसे देश में, जहां धूप आसानी से उपलब्ध है, फिर भी रिकेट्स का पाया जाना एक गंभीर चिंता का विषय है।
रिकेट्स का अर्थ है बच्चों में होने वाला हड्डियों का रोग, जिसमें हड्डियां पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं बन पातीं। इस रोग में हड्डियों का खनिजीकरण सही ढंग से नहीं हो पाता, जिससे वे मुड़ सकती हैं या विकृत हो सकती हैं।
विटामिन D शरीर में कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है। इसकी कमी रिकेट्स का सबसे बड़ा कारण है।
अगर बच्चे के आहार में दूध, दही, पनीर जैसी चीजें पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं, तो हड्डियों का विकास प्रभावित होता है।
आजकल बच्चे घर के अंदर अधिक समय बिताते हैं। पर्याप्त धूप न मिलने से शरीर में विटामिन D नहीं बन पाता।

रिकेट्स से प्रभावित बच्चे का चेहरा, पोषण की कमी के लक्षण
फास्ट फूड, जंक फूड और पोषणहीन आहार भी रिकेट्स का कारण बन सकता है।
रिकेट्स की पहचान डॉक्टर द्वारा शारीरिक जांच, एक्स-रे और खून की जांच से की जाती है। खून में विटामिन D, कैल्शियम और फॉस्फोरस का स्तर जांचा जाता है।
डॉक्टर की सलाह से विटामिन D की दवा दी जाती है।

विटामिन डी की गोलियां, रिकेट्स के इलाज में आवश्यक पोषक तत्व
कैल्शियम की कमी पूरी करने के लिए दवाइयां या सिरप दिए जाते हैं।
दूध, दही, अंडा, मछली और हरी सब्जियों को भोजन में शामिल किया जाता है।
सुबह की धूप में 20–30 मिनट रहना फायदेमंद होता है।
रिकेट्स एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। समय पर पहचान और सही इलाज से बच्चे की हड्डियों को मजबूत बनाया जा सकता है और भविष्य में होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है।
डॉ. अंकुर सिंह के मार्गदर्शन में बच्चों की हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का वैज्ञानिक और सुरक्षित इलाज उपलब्ध है, जिससे आपका बच्चा स्वस्थ विकास की ओर बढ़ सके।