
उंगलियां चटकाते समय हाथों के जोड़ों में हल्का दबाव महसूस करती महिला
कई लोगों को उंगलियां, गर्दन या पीठ चटकाने में आराम महसूस होता है। कुछ लोग इसे आदत के तौर पर करते हैं, तो कुछ तनाव या जकड़न के कारण। अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या यह आदत आगे चलकर गठिया जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।
जब हम उंगलियां या गर्दन चटकाते हैं, तो जोड़ों के अंदर मौजूद द्रव में गैस के बुलबुले बनते और फूटते हैं। इसी प्रक्रिया से आवाज़ आती है। यह आवाज़ हड्डियों के टकराने से नहीं होती, जैसा आमतौर पर समझा जाता है।
अब तक किए गए अध्ययनों में यह साबित नहीं हुआ है कि केवल उंगलियां चटकाने से सीधे तौर पर गठिया होता है। यानी यह कहना गलत होगा कि हर व्यक्ति जो उंगलियां चटकाता है, उसे गठिया हो ही जाएगा।
अगर बहुत ज़ोर लगाकर बार-बार जोड़ों को चटकाया जाए, तो इससे आसपास की मांसपेशियों और लिगामेंट्स पर असर पड़ सकता है।
अगर चटकाने के साथ दर्द, सूजन या अकड़न हो, तो यह किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है।
गर्दन चटकाने में विशेष सावधानी ज़रूरी है। गलत तरीके से गर्दन मोड़ने पर नसों या मांसपेशियों को नुकसान हो सकता है।

लैपटॉप पर काम करते समय गर्दन में दर्द और अकड़न महसूस करता व्यक्ति
उम्र के साथ जोड़ों का घिसाव बढ़ता है।

उम्र बढ़ने के साथ हाथों के जोड़ों में दर्द और अकड़न से परेशान बुजुर्ग महिला
पुरानी चोटें गठिया का कारण बन सकती हैं।
अधिक वजन से जोड़ों पर ज़्यादा दबाव पड़ता है।
कुछ लोगों में गठिया की संभावना परिवार से जुड़ी होती है।
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
जोड़ों की जकड़न के लिए हल्की एक्सरसाइज बेहतर विकल्प है।
गलत बैठने या काम करने की आदत से भी चटकाने की ज़रूरत महसूस होती है।
तनाव की वजह से भी लोग अनजाने में यह आदत अपनाते हैं।
अगर आपको जोड़ों में दर्द, सूजन या चलने-फिरने में परेशानी हो रही है, तो केवल चटकाने को दोष देने के बजाय सही जांच करवाना ज़रूरी है।
अगर आपको जोड़ों के दर्द, अकड़न या गठिया से जुड़ी कोई समस्या है, तो Dr. Ankur Singh से सलाह लें। सही मार्गदर्शन और इलाज से जोड़ों को स्वस्थ रखा जा सकता है।