
डॉक्टर मरीज को स्कैन रिपोर्ट समझाते हुए
आजकल दर्द होते ही सबसे पहला सवाल यही होता है – “MRI करवा लें क्या?” कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के MRI करवा लेते हैं, जबकि कुछ मामलों में इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं होती।
इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि MRI कब ज़रूरी होती है, कब नहीं, और कब सिर्फ जांच से ही समस्या का पता चल सकता है।
MRI एक जांच है जो शरीर के अंदर मौजूद मांसपेशियों, नसों, लिगामेंट और डिस्क की विस्तृत तस्वीर देती है। यह एक्स-रे से अलग होती है क्योंकि इसमें रेडिएशन नहीं होता।
अगर दर्द 2 से 3 हफ्तों तक ठीक न हो और इलाज से राहत न मिले, तो MRI जरूरी हो सकती है।
अगर दर्द कमर से पैर या गर्दन से हाथ तक फैल रहा है, झनझनाहट या सुन्नपन हो रहा है, तो MRI से नसों की स्थिति समझी जाती है।
गिरने या एक्सीडेंट के बाद अगर चलने में परेशानी हो या कमजोरी महसूस हो, तो अंदरूनी चोट देखने के लिए MRI जरूरी होती है।
अगर दर्द हाल ही में शुरू हुआ है और आराम से कम हो रहा है, तो MRI की जरूरत नहीं होती।
माइल्ड मसल स्ट्रेन या थकान से हुआ दर्द आमतौर पर आराम और दवाओं से ठीक हो जाता है।

डॉक्टर एमआरआई स्कैन की रिपोर्ट कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचते हुए
MRI रिपोर्ट में कई बार उम्र के साथ होने वाले बदलाव दिखते हैं, जो दर्द का कारण नहीं होते, लेकिन मरीज डर जाता है।
कभी-कभी रिपोर्ट देखकर बिना जरूरत दवाएं या इलाज शुरू हो जाता है, जो समस्या को बढ़ा सकता है।
अक्सर सही जांच से ही यह तय हो जाता है कि MRI की जरूरत है या नहीं।
जहां जरूरत हो, वहां MRI करवाने से सही कारण पता चलता है और इलाज सही दिशा में आगे बढ़ता है। सही समय पर की गई MRI भविष्य की जटिलताओं से बचा सकती है।

अस्पताल में स्थित एमआरआई मशीन की जांच प्रक्रिया
MRI एक महत्वपूर्ण जांच है, लेकिन हर दर्द के लिए जरूरी नहीं। सही सलाह के बिना MRI करवाना समय, पैसे और मानसिक तनाव तीनों बढ़ा सकता है। सबसे जरूरी है कि पहले समस्या को समझा जाए, फिर जांच करवाई जाए।
अगर आप कन्फ्यूज हैं कि MRI करानी चाहिए या नहीं, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है।
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