Paget’s Disease क्या है? (Paget’s Disease Meaning in Hindi)

An illustration showing leg bone deformity caused by Paget’s disease due to abnormal bone remodeling.

पैजेट्स रोग में प्रभावित पैर की हड्डी, जिसमें असामान्य हड्डी वृद्धि और विकृति दिखाई गई है

अगर आपको या आपके किसी जानने वाले को हड्डियों से जुड़ी कोई असामान्य समस्या बताई गई है और डॉक्टर ने “Paget’s Disease” का नाम लिया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इस लेख में हम आसान और बातचीत वाली हिंदी में समझेंगे कि Paget’s Disease क्या होती है, इसके लक्षण क्या हैं, क्यों होती है और इसका इलाज कैसे किया जाता है।

Paget’s Disease का मतलब हिंदी में

Paget’s Disease को हिंदी में “पेजेट्स रोग” कहा जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियों के बनने और टूटने की प्रक्रिया (bone remodeling) असामान्य हो जाती है।

सामान्य रूप से हमारी हड्डियां लगातार टूटती और फिर बनती रहती हैं, लेकिन Paget’s Disease में यह प्रक्रिया बहुत तेज और असंतुलित हो जाती है। नतीजा यह होता है कि नई हड्डी कमजोर, मोटी और विकृत बन जाती है।

Paget’s Disease किन हड्डियों को प्रभावित करती है?

यह बीमारी शरीर की किसी भी हड्डी को प्रभावित कर सकती है, लेकिन आमतौर पर यह इन हिस्सों में ज्यादा देखी जाती है:

  • कूल्हे की हड्डी
  • रीढ़ की हड्डी
  • खोपड़ी
  • पैरों की लंबी हड्डियां
  • कंधे की हड्डियां

हर मरीज में सभी हड्डियां प्रभावित हों, ऐसा जरूरी नहीं है।

Paget’s Disease के लक्षण

कई बार Paget’s Disease में शुरुआत में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते और यह बीमारी किसी अन्य जांच के दौरान पकड़ में आती है। लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, ये लक्षण दिख सकते हैं:

आम लक्षण

  • हड्डियों में लगातार दर्द
  • हड्डियों का मोटा या टेढ़ा होना
  • शरीर की बनावट में बदलाव
  • जोड़ों में दर्द और अकड़न
  • बार-बार हड्डी टूटना

गंभीर मामलों में

  • सिरदर्द या सुनने में कमी (अगर खोपड़ी प्रभावित हो)
  • पैरों का टेढ़ा होना
  • चलने में परेशानी

Paget’s Disease क्यों होती है?

Paget’s Disease के सही कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन कुछ संभावित कारण माने जाते हैं:

जेनेटिक कारण

अगर परिवार में किसी को Paget’s Disease रही हो, तो अगली पीढ़ी में इसका खतरा बढ़ सकता है।

वायरल संक्रमण

कुछ रिसर्च में यह माना गया है कि बचपन में हुए कुछ वायरल इंफेक्शन आगे चलकर इस बीमारी को ट्रिगर कर सकते हैं।

उम्र का बढ़ना

यह बीमारी आमतौर पर 50 साल की उम्र के बाद ज्यादा देखी जाती है।

Paget’s Disease की जांच कैसे होती है?

डॉक्टर Paget’s Disease की पुष्टि के लिए कुछ जांच करवाते हैं:

  • एक्स-रे, जिससे हड्डियों की बनावट देखी जाती है
  • ब्लड टेस्ट, खासतौर पर Alkaline Phosphatase (ALP)
  • बोन स्कैन, जिससे यह पता चलता है कि कौन-कौन सी हड्डियां प्रभावित हैं
A medical professional preparing an imaging machine to examine bone structure and diagnose bone disorders.

हड्डियों की जांच के लिए एक्स-रे मशीन के साथ मरीज की मेडिकल जांच

Paget’s Disease का इलाज

अच्छी बात यह है कि Paget’s Disease को कंट्रोल किया जा सकता है।

दवाइयां

बिस्फॉस्फोनेट्स, जो हड्डियों के असामान्य बनने की प्रक्रिया को धीमा करती हैं

दर्द कम करने की दवाइयां

फिजियोथेरेपी

फिजियोथेरेपी से जोड़ों की मूवमेंट और मांसपेशियों की ताकत बेहतर होती है।
A senior patient undergoing physiotherapy with a specialist to improve mobility and reduce bone-related pain.

पैजेट्स रोग या हड्डियों की समस्या में फिजियोथेरेपी के दौरान वरिष्ठ मरीज की एक्सरसाइज

सर्जरी

बहुत गंभीर मामलों में, जैसे हड्डी का बहुत ज्यादा टेढ़ा होना या फ्रैक्चर, सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

Paget’s Disease में जीवनशैली का रोल

  • कैल्शियम और विटामिन D युक्त आहार लें
  • नियमित हल्का व्यायाम करें
  • वजन संतुलित रखें
  • डॉक्टर की सलाह के बिना भारी एक्सरसाइज न करें

निष्कर्ष

Paget’s Disease एक गंभीर लेकिन मैनेजेबल बीमारी है। समय पर पहचान और सही इलाज से इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर आपको हड्डियों में लंबे समय से दर्द या कोई असामान्य बदलाव महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

अगर आपको हड्डियों से जुड़ी किसी भी समस्या को लेकर सही मार्गदर्शन चाहिए, तो ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ Dr. Ankur Singh से परामर्श लेना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

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