
उम्र बढ़ने के साथ घुटनों में दर्द की समस्या
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे घुटनों, कूल्हों, कमर और कंधों में दर्द की शिकायत आम हो जाती है। कई लोग इसे उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर सहन करते रहते हैं, लेकिन हर जोड़ों का दर्द सामान्य नहीं होता। समय रहते कारण समझना और इलाज करना जरूरी है।
इस लेख में हम जानेंगे कि उम्र बढ़ने पर जोड़ों में दर्द क्यों बढ़ता है, इसके पीछे कौन-से कारण जिम्मेदार होते हैं और सही इलाज क्या है।
उम्र के साथ शरीर की हड्डियां और जोड़ धीरे-धीरे घिसने लगते हैं। जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज पतला होने लगता है, जिससे हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं। यही प्रक्रिया दर्द और जकड़न का कारण बनती है।
यह उम्र से जुड़ी सबसे आम बीमारी है, जिसमें कार्टिलेज धीरे-धीरे खत्म हो जाता है।
उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियां कमजोर होती हैं, जिससे जोड़ों पर दबाव बढ़ता है।
हड्डियों की मजबूती कम होने से दर्द और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है।
लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से जोड़ जकड़ जाते हैं।
अधिक वजन घुटनों और कूल्हों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
हल्का योग, वॉकिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जोड़ों को मजबूत बनाती है।

जोड़ों के दर्द के बावजूद नियमित वॉक करते वरिष्ठ व्यक्ति
कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन D युक्त भोजन जरूरी है।
वजन नियंत्रण से जोड़ों पर दबाव कम होता है।
गलत पोस्चर दर्द को बढ़ा सकता है।
दर्द और सूजन कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह से दवाइयां ली जाती हैं।
मांसपेशियों को मजबूत कर दर्द में राहत देती है।

फिजियोथेरेपी के माध्यम से जोड़ों की मजबूती का अभ्यास
कुछ मामलों में विशेष इंजेक्शन फायदेमंद होते हैं।
बहुत गंभीर स्थिति में ही सर्जरी की सलाह दी जाती है।
अगर जोड़ों का दर्द रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगे, चलने-फिरने में दिक्कत हो या दर्द लगातार बढ़ रहा हो, तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
उम्र से जुड़ी जोड़ों की समस्याओं के समग्र मूल्यांकन और प्रभावी इलाज के लिए डॉ. अंकुर सिंह, अनुभवी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से सलाह लें, जो आधुनिक चिकित्सा और व्यक्तिगत देखभाल पर भरोसा रखते हैं।