
धूम्रपान के कारण तनाव और स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान व्यक्ति
अक्सर लोग यह मानते हैं कि धूम्रपान फेफड़ों को और शराब लिवर को नुकसान पहुंचाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिगरेट और शराब आपकी हड्डियों की सेहत को भी धीरे-धीरे कमजोर कर देते हैं?
अगर आपको बार-बार कमर दर्द, घुटनों में दर्द या छोटी सी चोट में फ्रैक्चर हो जाता है, तो इसका कारण सिर्फ उम्र नहीं हो सकता। कई बार धूम्रपान और शराब का लंबे समय तक सेवन आपकी हड्डियों को अंदर से खोखला बना देता है।
एक ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ के रूप में, मैं यह स्पष्ट कहना चाहूंगा कि हड्डियों की मजबूती केवल कैल्शियम से नहीं, बल्कि आपकी जीवनशैली से भी जुड़ी होती है।
सिगरेट में मौजूद निकोटिन शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को कम कर देता है। जब शरीर कैल्शियम को सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, तो हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं।
धूम्रपान करने वाले लोगों में बोन मिनरल डेंसिटी कम पाई जाती है। इसका मतलब है कि उनकी हड्डियां सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक पतली और कमजोर होती हैं।
यह स्थिति आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस का रूप ले सकती है।
धूम्रपान करने वालों में हड्डियों का जुड़ना भी धीमा होता है। यदि फ्रैक्चर हो जाए तो उसे ठीक होने में अधिक समय लगता है।
घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी पर इसका विशेष प्रभाव देखा जाता है।

धूम्रपान निषेध चिन्ह जो सिगरेट से होने वाले नुकसान को दर्शाता है
अधिक मात्रा में शराब पीने से शरीर के हार्मोन प्रभावित होते हैं। यह हड्डियों के निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया को बाधित करता है।
शराब लिवर के काम को प्रभावित करती है, जिससे विटामिन D का निर्माण प्रभावित होता है। विटामिन D के बिना कैल्शियम सही तरह से अवशोषित नहीं हो पाता।
शराब मांसपेशियों को कमजोर करती है, जिससे संतुलन बिगड़ सकता है। संतुलन बिगड़ने से गिरने का खतरा बढ़ता है और फ्रैक्चर की संभावना अधिक हो जाती है।

अत्यधिक शराब सेवन से परेशान व्यक्ति और खाली बोतलें
बहुत से युवा सोचते हैं कि हड्डियों की समस्या केवल बुजुर्गों को होती है। लेकिन सच्चाई यह है कि 25–30 वर्ष की उम्र तक हड्डियों की अधिकतम मजबूती बनती है।
अगर इस उम्र में धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन किया जाए, तो भविष्य में हड्डियों की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
महिलाओं में मेनोपॉज के बाद पहले से ही हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। यदि साथ में धूम्रपान या शराब की आदत हो, तो ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इसलिए महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
यदि आपको इनमें से कोई लक्षण दिखें, तो सावधान हो जाएं:
ये संकेत हो सकते हैं कि आपकी हड्डियां अंदर से कमजोर हो रही हैं।
अच्छी खबर यह है कि समय रहते कदम उठाए जाएं तो हड्डियों को बचाया जा सकता है।
सिगरेट छोड़ने के कुछ ही महीनों में शरीर में सुधार शुरू हो जाता है। बोन डेंसिटी में धीरे-धीरे सुधार संभव है।
यदि पूरी तरह छोड़ना संभव न हो, तो सेवन की मात्रा सीमित करें। नियमित और अधिक मात्रा में शराब से बचें।
अपने आहार में शामिल करें:
वजन उठाने वाले और वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। तेज चलना, हल्की दौड़, स्क्वाट्स, योग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग लाभकारी हैं।
यदि आप लंबे समय से धूम्रपान या शराब का सेवन कर रहे हैं, तो बोन डेंसिटी टेस्ट कराना उपयोगी हो सकता है। समय पर जांच से हड्डियों की कमजोरी का पता चल सकता है और उचित उपचार शुरू किया जा सकता है।
दवाइयां मदद कर सकती हैं, लेकिन असली सुधार आपकी आदतों में बदलाव से ही संभव है।
यदि आप सच में अपनी हड्डियों को मजबूत रखना चाहते हैं, तो आज ही धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।
याद रखिए, मजबूत हड्डियां ही सक्रिय जीवन की नींव हैं।
धूम्रपान और शराब केवल आपके फेफड़ों और लिवर को ही नहीं, बल्कि आपकी हड्डियों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। लंबे समय तक इन आदतों को जारी रखना भविष्य में गंभीर हड्डी रोगों का कारण बन सकता है।
अगर आपको घुटनों में दर्द, कमर दर्द या हड्डियों से जुड़ी कोई समस्या महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। हड्डियों की जांच और सही मार्गदर्शन के लिए आज ही Dr Ankur Singh से परामर्श लें और अपनी हड्डियों को मजबूत भविष्य दें।