
हड्डी का मॉडल समझाते हुए डॉक्टर
“यह तो सामान्य है” — यह वाक्य हड्डियों के दर्द के साथ सबसे अधिक बोला जाता है।
अधिकांश लोग दर्द को बीमारी नहीं, बल्कि उम्र या जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा मान लेते हैं।
यही सोच दर्द को लंबे समय तक बढ़ने देती है और इलाज में देर हो जाती है।
इस लेख में हम हड्डियों और जोड़ों के दर्द से जुड़ी 7 आम गलतफहमियों और उनके पीछे के सच को समझेंगे।
उम्र बढ़ने के साथ बदलाव होते हैं, लेकिन लगातार दर्द सामान्य नहीं है।
सही देखभाल और उपचार से दर्द को नियंत्रित किया जा सकता है।

पार्क में दौड़ लगाते हुए स्वस्थ बुज़ुर्ग पुरुष
बिना मार्गदर्शन के किया गया व्यायाम हानिकारक हो सकता है, लेकिन सही व्यायाम जोड़ों को मजबूत बनाता है।
व्यायाम पूरी तरह छोड़ देना दर्द को और बढ़ा देता है।

प्राकृतिक वातावरण में योग करते हुए महिला
दर्द निवारक दवाएँ समस्या को ठीक नहीं करतीं, केवल दर्द को दबाती हैं।
लंबे समय तक इनका उपयोग असली कारण को छिपा देता है।
कैल्शियम आवश्यक है, लेकिन मांसपेशियों का असंतुलन, गलत मुद्रा और अधिक दबाव भी दर्द का कारण बनते हैं।
शुरुआती अवस्था में इलाज सरल और प्रभावी होता है।
देर करने से विकल्प सीमित हो जाते हैं।
आज युवाओं में भी गर्दन, कमर और घुटनों का दर्द आम हो चुका है।
लंबे समय तक बैठना और कम शारीरिक गतिविधि इसका बड़ा कारण है।
सही जाँच, व्यायाम और जीवनशैली में सुधार से कई मामलों में शल्य चिकित्सा की आवश्यकता नहीं पड़ती।
हड्डियों का दर्द सामान्य मान लेना सबसे बड़ी गलती है।
सही जानकारी और समय पर इलाज से दर्द को जीवन का हिस्सा बनने से रोका जा सकता है।
यदि आप हड्डियों या जोड़ों के दर्द को सामान्य मानकर अनदेखा कर रहे हैं, तो हड्डी रोग विशेषज्ञ Dr Ankur Singh से परामर्श लेकर सही मार्गदर्शन प्राप्त करें और सक्रिय जीवन बनाए रखें।