
एक्स-रे रिपोर्ट देखकर मरीज को जोड़ों की समस्या समझाता हुआ डॉक्टर
कई लोग तब डॉक्टर के पास जाते हैं जब दर्द असहनीय हो जाता है। तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है और अक्सर सर्जरी ही आख़िरी विकल्प बचता है। लेकिन सच यह है कि अगर सही समय पर जांच हो जाए, तो कई गंभीर सर्जरी से आसानी से बचा जा सकता है।
हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं में early diagnosis यानी शुरुआती पहचान सबसे बड़ा गेम-चेंजर होती है।
Early diagnosis का मतलब है—
जब बीमारी शुरुआती स्टेज में होती है, तब इलाज भी आसान, कम खर्चीला और बिना सर्जरी के संभव होता है।
अक्सर लोग सोचते हैं, “उम्र बढ़ रही है, थोड़ा दर्द तो होगा ही।”
यही सोच धीरे-धीरे बड़ी समस्या बना देती है।
तेल मालिश, दर्द की दवा, या इंटरनेट के नुस्खे—ये अस्थायी राहत देते हैं, बीमारी को खत्म नहीं करते।
कई लोग सिर्फ इसलिए डॉक्टर के पास नहीं जाते क्योंकि उन्हें डर होता है कि “डॉक्टर ऑपरेशन बोल देंगे।”
हकीकत इसके उलट है—समय पर दिखाने से ही सर्जरी से बचा जा सकता है।
शुरुआती स्टेज में घुटनों का दर्द अक्सर
से ठीक हो सकता है। देरी करने पर यही दर्द Knee Replacement तक पहुंच सकता है।

फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा मरीज के हाथ की रिहैबिलिटेशन थेरेपी कराते हुए
अगर शुरू में ही सही posture, exercises और दवाइयों से इलाज हो जाए, तो सर्जरी की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।

घर पर पीठ दर्द से परेशान महिला कमर पकड़ते हुए
छोटे फ्रैक्चर या stress fractures को नजरअंदाज करना गलत है। समय पर इलाज न मिलने पर हड्डी गलत तरीके से जुड़ सकती है।
आर्थराइटिस की शुरुआती पहचान से joint damage को काफी हद तक slow किया जा सकता है।
सर्जरी अक्सर last option होती है, first नहीं।
ये शरीर के warning signs होते हैं।
हर दर्द का इलाज painkiller नहीं होता।
एक अनुभवी orthopedic doctor:
गलत या अधूरा इलाज समस्या को और बढ़ा सकता है।
Early diagnosis सिर्फ बीमारी पकड़ने का नाम नहीं है, यह भविष्य को बेहतर बनाने का फैसला है।
अगर आप समय रहते जांच करवा लेते हैं, तो
याद रखें, शरीर आपको पहले संकेत देता है—उन्हें अनसुना न करें।
Dr. Ankur Singh, वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन, Noida, हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं का समय पर और सर्जरी-फ्री इलाज प्रदान करते हैं।